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Wednesday, March 19, 2014

छह मुल्ले मोदी के साथ क्यों....

                                                 ये मैं नहीं फेसबुक पर लोग कह रहे हैं




Note : This article also available on NBT ONLINE. Most of the readers are commenting there. You can visit there and read comments. Link - http://blogs.navbharattimes.indiatimes.com/yusufkirmani/entry/bjp-trying-to-woo-muslims

नोटः .ये लेख नवभारत टाइम्स की अॉनलाइन साइट पर भी उपलब्ध है। वहां पाठकों की भारी प्रतिक्रिया आ रही है। उन प्रतिक्रियाओं को पढ़ने और सारे मुद्दे को समझने के लिए आप भी वहां जाकर टिप्पणियों को पढ़ सकते हैं। इस लिंक पर जाएं - http://blogs.navbharattimes.indiatimes.com/yusufkirmani/entry/bjp-trying-to-woo-muslims


चुनाव का मौसम है...फेसबुक का साथ है...वल्लाह क्या बात है। कायदे से इस तरह से मेरे लेख की शुरुआत नहीं होनी चाहिए थी लेकिन अब हो गई तो आइए बात करते हैं। हुआ यह कि अभी नरेंद्र मोदी का एक फोटो कुछ मौलाना लोगों के साथ अखबारों और फेसबुक पर प्रकट हुआ। ....आफत हो गई। मौलाना लोगों को यह गलतफहमी है कि वे अगर हां कहेंगे तो इस देश के मुसलमान हां कहेंगे औऱ नहीं कहेंगे तो नहीं...पर उनकी इस गलतफहमी को भारत के मुसलमान बार-बार दूर कर रहे हैं लेकिन भाई लोग फिर भी न मानने को तैयार हैं और न ही सबक लेने को।

यह एक आम फोटो है जिसके जरिए संदेश देने की कोशिश की गई है कि अब तो मौलानाओं का भी समर्थन मोदी को मिल गया है। जो लोग इस जवाब की तलाश में है कि इस बार मोदी क्यों नहीं अपने भाषण में दंगों का, मुसलमानों का जिक्र नहीं कर रहे हैं तो उन्हें जवाब मिल गया होगा।

अब ये फोटो जैसे ही फेसबुक पर शेयर होने लगी तो आम मुसलमान हाथ धोकर पीछे पड़ गया। मुझे लगा कि इस फोटो पर उन लोगों के विचार आप लोगों के सामने आने चाहिए जो इस चुनाव में किसी गलतफहमी का शिकार हैं....तो अपनी बात यहीं पर खत्म...अब नीचे पढ़ें उस फोटो पर आम लोगों की प्रतिक्रिया....





अख्तर खान अकेला 
कल मुझ से किसी ने कहा के कुछ लोग दाडी तो रख लेते है लेकिन खतना इनकी ठीक तरह से नहीं होती ,, पता नहीं सच क्या है ,,,,


सातों मुल्ले एक साथ.....कौन कहता है कौम और मुल्लों में मिल्लत नहीं है....??
Seven mulle together. ....Who says the community and is not in millat mullon?? (Translated by Bing)


Usman Khan Ye sub muslman nhai dadi ki aad mai r.s.s. Ke agent hai.


Vora Nasir Inko kom shaye koi matlab nahi inka iman tho paisa or jina haye Allah tala kaye ghar kaye shabshaye bdaey chor haye

Nawab Shaheen Afroz wo madani to modi ki gadiyo m ghomta h

Zulfiqar Khan Shame on all of them.

Shiv Rao mout ka sodagar

Riyasat Ali Qoum ke gaddhar hai ye dadi wale


Syed Masum शक्ल से तो मुल्ले नहीं लग रहे 

Mazid Khan Khaildar Munafik hai yeh sab

Yusuf  हर दाढ़ी रखने वाला मुसलमान नहीं होता, जैसे हर चुटिया रखने वाला पंडित नहीं होता।...अगर दारुल नदवा और देवबंद मोदी के साथ हैं तो यह अंदाजा मत लगाइए कि सारे दाढ़ी वाले उनके साथ हैं...


Mohammed Tarique Azmi kaun Bewakuf kahta hai k Kabul me gadhe nahe hotey hai,1992 ka 6 Dec.yad hai,apne 54 gadhe b parliament me the sirf ek Ghoda nikala C.K.Jafer Shareef baki sab gadhe.aur ye Alhale Hadees,Deobandi ahale khabbis kab musalman hai jo inki baat ki jai.dekh lo ye sab wahabi hai.

Sd Sharma ACHHA TO YAH HOTA KI MODI BHI IN KI TOPI PAHAN LETA.


Vinit Vijay काश हमारे इस भारत में ऐसे दिन भी आये, हिंदू मुस्लिम दोनों मिलकर एक साथ मुस्काए। तुम मस्जिद की मीनारों से होली जलती देखो, हम मंदिर में शंख बजाकर अपनी ईद मनाये।

Yusuf कल्पना अच्छी है...हम लोग हमेशा साथ थे और रहेंगे...पर इस फोटो के संदर्भ में आपके ये विचार बेमानी लगते हैं। नेताओं के संदर्भ में इस तरह के विचार न प्रकट करें। वे गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं...वे रंगे हुए सियार हैं...चाहे आपके हों या हमारे हों...एेसे गिरगिटों और ऐसे सियारों को नंगा करना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत हैं। आप जरा समझिए...इस देश के साथ कुछ लोग बहुत बड़ी साजिश कर रहे हैं...ये फोटो और ये गिरगिट लोग उसी साजिश का हिस्सा हैं...उसका संचालन करने वाले...

Zamin Hussain Dadi ke topi pe na jao ...in jese bikau nkali molviyo se savdhan ....

Zamin Hussain Sale salman khan ke to piche pad gye the pta nhi kya kya keh thw the use ..ab in bikao dadi topi ka kya kre....


Faheem Abbad Farahi bikaau mullaoN sey hoshiyar rahiye

अख्तर खान अकेला इस्लाम में जिन मोलवी मौलानाओं को दीनी तालीम देने लायक़ बनाया है ,,जिन इमामों को नमाज़ पढ़ाने का दर्जा दिया है ऐसे दीन के जानकार अगर दिनी तब्लीग को छोड़कर सियासत में जुड़कर खुद को बेच दे और हुलिया इस्लाम का बना कर इस्लाम को बदनाम करे अपने हुलिये के इस्लामिक तोर तरीक़े बताकर सियासी तोर पर रूपये और सियासी पदों की सौदेबाज़ी करे तो ऐसे लोगों के लिए दुनिया तो क्या जहन्नुम में भी जगह नहीं है ,,,,,,,,,,,,ऐसा तो क़ुरान और हदीस की तालीम से निकल कर आता है फिर भी यह मोलाना ,,,मोलवी ,,,इमाम ,,जो इस्लाम आम मुसलमान से ज़यादा समझते है सियासी गुलामी और सौदेबाज़ी का जुर्म खूब करते है अल्लाह से डरते नहीं और दुनियावी लोगों से डर कर उनके सामने खुद को इस्लामिक हुलिया बनाकर बेच कर पार्टियों के ब्रांड एम्बेसेडर प्रचारक बनने का गुनाह करते है अल्लाह तोबा ऐसे लोगों को खुदा अक़ल दे ,,अगर सियासत करना है तो फिर तब्लीग का हुलिया इस्लाम का हुलिया हटा कर आम हुलिया बनाओ मोलवी गिरी मोलाना गिरी छोडो और फिर सियासी रूप से आज़ाद होकर जिधर चाहे उधर जाइये और प्रचार करिये किसी को कोई ऐतराज़ नहीं रहेगा ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Anis Ansari Kya peta photo khivhane ke paisa mile ho




फोटो के बारे मेंः ये फोटो फेसबुक से साभार सहित लिया गया है।

Wednesday, March 5, 2014

वो दोनों किसी जमात में नहीं शामिल

- यह लेख नवभारत टाइम्स की आनलाइन साइट nbt.in or navbharattimes.com पर भी उपलब्ध है...


गुजरात में हुए जनसंहार (Gujarat Genocide) को एक दशक बीत चुके हैं। इसके अलावा भी इस दौरान और इसके बाद दंगों वाले कई शहरों में रहना और उस शहर को जीता रहा। तमाम तल्ख सच्चाइयों से रूबरू होता रहा। एक दशक बाद गुजरात के दंगों (Gujarat Riots) पर बात होती है तो कहा जाता है कि गड़े मुर्दे उखाड़ने की अब क्या जरूरत है लेकिन गुजरात दंगों के दो चेहरों कुतुबुद्दीन अंसारी और अशोक मोची पर दंगों के बाद जो गुजरी औऱ अब इनके क्या विचार हैं, इससे जानना और लोगों तक इनकी बात पहुंचाना बहुत जरूरी है।

गोधरा कांड के बाद गुजरात में दंगे शुरू हो गए और अखबारों में वहां की भयावह खबरे और फोटो सामने आने लगे। लोगों के मानसपटल पर दो फोटो उस वक्त जो छाए तो आज भी वो दो फोटोग्राफ भुलाए भी नहीं भूलते। एक फोटो कुतुबुद्दीन अंसारी का, जिसमें हाथ जोड़ते औऱ आंखों में आंसू लिए हुए अंसारी रहम की भीख मांगते हुए और दूसरा अशोक मोची का फोटो, जिसमें हाथ में रॉड और माथे पर दुपट्टा (आप समझ सकते हैं कि ये कौन सा दुपट्टा होता है) बांधे एक भयावह चेहरा जो दंगों के दौरान जलते हुए अहमदाबाद शहर के बीच विजय का शंखनाद कर रहा है।


...वक्त बीतता गया। ज़किया जाफरी की इंसाफ की लड़ाई आज भी खत्म नहीं हुई लेकिन गुजरात बकौल कुछ उद्योगपतियों, फिल्म स्टारों, नेताओं, चापलूस पत्रकारों, बुद्धुजीवियों के विकास करता रहा। प्रयोगशाला में सारे प्रयोग एक-एक कर सफल होते जा रहे थे।...पर कुतुबुद्दीन अंसारी और अशोक मोची इस विकास में पिछड़ गए।

अंसारी उन गुजराती मुसलमानों की जमात में शामिल नहीं हुए जो फिरौती (Ransom) के रूप में किसी नेता का गुणगान करते फिरें या उसके फोटो चूमते या उसे टोपी पहनाते हुए मंच पर नजर आएं।

मोची ने न सिर्फ बजरंग दल छोड़ा बल्कि राजनीति ही छोड़ दी। उन्हें अब लग रहा है कि घृणा की राजनीति ने उन्हें अपना हथियार बनाया था। उन जैसे लोगों का इस्तेमाल किया गया था। वह अहमदाबाद के एक स्लम एरिया में अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं और उनके पास या उनके परिवार के पास इतना भी पैसा नहीं है कि उनकी शादी हो सके।


...वक्त का पहिया तेजी से घूमा। अंसारी और मोची आज बहुत अच्छे दोस्त हैं। संयोग देखिए कि वो अपने-अपने धर्म में जातियों के बंटवारे के हिसाब से अत्यंत पिछड़ी जमात में शामिल हैं। उनका अपना भाईचारा कायम है। दोनों ही कम्युनिस्ट (Communist) नहीं हैं औऱ न कॉर्ल मार्क्स (Karl Marx) के बारे में कुछ जानते हैं लेकिन दोनों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी या माकपा (सीपीएम CPM) के एक कार्यक्रम में केरल में मंच साझा किया। वहां मोची ने अंसारी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। अंसारी ने उन्हें माफ भी कर दिया। 


लेकिन क्या वक्त...इतिहास...गुजरात के जनसंहार या ऐसे किसी भी दंगे को माफ करेगा...शायद नहीं। महज अंसारी औऱ मोची के किसी मंच पर एकसाथ मिलकर हाथ जोड़ने से कुछ नहीं होने वाला। देश को ऐसे भाईचारे की जरूरत है...वरना विकास चंद लोगों का होगा और हाशिए पर ढेर सारे अंसारी और मोची चले जाएंगे।  

नोट - इन तथ्यों की पुष्टि या ज्यादा जानकारी के लिए आप 5 मार्च 2014 का द टाइम्स आफ इंडिया (The Times of India March 05, 2014, Page 11) भी देख सकते हैं। या अॉनलाइन पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैंः http://timesofindia.indiatimes.com/india/12-years-on-faces-of-Gujarat-riots-share-a-room-and-a-dream-of-peace/articleshow/31440200.cms

Note: To check about this story please read The Times of India March 05, 2014, Page 11 and to read online, click on this link: http://timesofindia.indiatimes.com/india/12-years-on-faces-of-Gujarat-riots-share-a-room-and-a-dream-of-peace/articleshow/31440200.cms 

Saturday, March 1, 2014

नरेंद्र मोदी रिमिक्स....भाजपा मुक्त भारत...Narendra Modi Sings Remix... BJP Mukt India...





A must watch Video...it's funny but message is clear.



इस विडियो को जरूर देखें...हालांकि काफी मजेदार है लेकिन एक संदेश भी है इसमें....