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Thursday, October 13, 2011

हमारी-आपकी जिंदगी में ब्लैकबेरी

क्या आपके पास ब्लैकबेरी (Blackberry) है, मेरे पास तो नहीं है। मैं इस मोबाइल फोन का विरोधी नहीं हूं। दरअसल पिछले तीन दिन से इसकी सेवाएं भारत सहित दुनिया के 6 करोड़ लोगों को नहीं मिल रही हैं। यह भारत के अखबारों की पहले पन्ने की खबर बन गई है। दुनिया के किसी और अखबार ने इस खबर को पहले पन्ने पर जगह नहीं दी। भारत में यह फोन आम आदमी इस्तेमाल नहीं करता। यह भारत के कॉरपोरेट जगत यानी बड़ी कंपनियों के बड़े अधिकारी, नौकरशाह, खद्दरधारी नेता, अमीर घरों के बच्चे, अमीर बनने की इच्छा रखने वाले और उनकी अपनी नजर में ठीकठाक वेतन पाने वाले प्रोफेशनल्स का यह चहेता फोन है। भारत में एक कहावत मशहूर है कि अगर आपका जूता अच्छी तरह चमक रहा है तो उससे आपकी हैसियत का अंदाजा लगाया जाता है। यानी वह जमात जो खुद को प्रभावशाली बताती है, आपको अपनी जमात में शामिल करने को तैयार है। अब उस जूते की जगह ब्लैकबेरी ने ले ली है।
मैं ब्लैकबेरी खरीद सकता हूं और उसकी सेवा का दाम भी चुका सकता हूं। लेकिन मुझे उसे ठीक तरह इस्तेमाल करना नहीं आता है। जब मैं मीटिंगों में जाता हूं तो वहां लोग अपने हाथ में ब्लैकबेरी निकालकर बैठे होते हैं और उसमें न जाने क्या कर रहे होते हैं। मेरे पास नोकिया (Nokia) का मामूली फोन है। इस बार बहुत हिम्मत जुटाकर टच वाला फोन (Touch Phone) लिया है लेकिन चलाने में थोड़ी असुविधा अब भी है। पर वह आसान है, इसलिए दिक्कत बढ़ी नहीं। वे लोग मेरे नोकिया फोन को बड़े अचरज से देखते हैं और मुझे बहुत पिछड़ा हुआ और पुरानी सोच का मान लेते हैं। खैर, इससे क्या फर्क पड़ता है। ब्लैकबेरी के ब्लैकआउट होने की खबर में यह भी पढ़ने को मिला कि कैसे टाटा (TATA Steel) कंपनी के एक बड़े अधिकारी इसलिए चिंतित दिखे कि वह अपनी कंपनी की कॉरपोरेट मीटिंग का सामना कैसे कर पाएंगे, जब उनका ब्लैकबेरी काम नहीं कर रहा है। क्योंकि वह ब्लैकबेरी पर फौरन ही सारी सूचना अपने सहयोगियों से मांग लेते हैं। इस सदी के महानायक बॉलिवुड (Bollywood) स्टार अमिताभ बच्चन भी परेशान हैं। उन्होंने ट्वीट (Tweet) करके बताया कि वह ब्लैकबेरी न चलने से कितने परेशान हैं। हालांकि उनका लड़का अभिषेक बच्चन आइडिया मोबाइल (Idea Mobile) सेवा का विज्ञापन करता है और उसी को सबसे अच्छी सेवा बताता है। अब शायद अमिताभ भी ब्लैकबेरी छोड़ आइडिया पर आ जाएं। पता नहीं, तब वह यह बात ट्वीट करेंगे या नहीं। हो सकता है अपने ब्लॉग पर लिखें। ब्लैकबेरी को भारत पसंद है। अमेरिका में जब उसकी इकोनॉमी ((American Economy)) का बैंड बज रहा है तो भारत में ब्लैकबेरी का मार्केट शेयर तेजी से बढ़ रहा है। साइबर मीडिया रिसर्च (Cyber Media Research) के मुताबिक भारत में 2010 में स्मार्टफोन (Smart Phone) मार्केट में ब्लैकबेरी का मार्केट शेयर यानी आधार 13 पर्सेट है जो 2009 के मुकाबले 8 पर्सेट ज्यादा है। पिछले चार साल में ब्लैकबेरी ने भारत में 7.7 लाख हैंडसेट बेचे हैं।
अब इनके मुकाबले भारत में जो कंपनियां इसी तरह की सेवा देने का दावा करती हैं, जैसे एयरटेल (Airtel) और वोडाफोन (Vodaphone), उनका नेटवर्क करीब-करीब रोजाना भारत के किसी न किसी इलाके में बैठा रहता है, कोई खबर नहीं बना पाते। बेचारे। हालांकि मैं एयरटेल का ग्राहक हूं लेकिन इस कंपनी की चिरकुटई से बेहत तंग हूं। इनके बिल में हेराफेरी आम बात है। लेकिन चूंकि भारत में इसका मार्केट शेयर सबसे ज्यादा है तो मेरा इसका ग्राहक बने रहना जरूरी है क्योंकि आम लोगों के पास एयरटेल के ही नंबर हैं। मुझे एक बड़े कंपनी के अधिकारी बता रहे थे कि एयरटेल का मालिक भी ब्लैकबेरी ही इस्तेमाल करता है और वह पूरी-पूरी मीटिंग ब्लैकबेरी के दम पर निपटाता है। हालांकि शायद आप लोगों को याद हो कि दो साल पहले भारत सरकार ने एक आदेश जारी कर सेना, इंटेलीजेंस एजेंसीज और टॉप रैंक के ब्यूरोक्रेट्स को कहा था कि वे ब्लैकबेरी का इस्तेमाल न करें। क्योंकि इससे देश की सुरक्षा को खतरा है। गृह मंत्रालय ने ब्लैकबेरी की सेवा देने वाली कंपनी रिसर्च इन मोशन के अफसरों को कई बार मीटिंग के लिए तलब किया लेकिन उन्होंने अंगूठा दिखाया और नहीं आए। बाद में पता नहीं क्या हुआ कि मामला सुलझ गया। वैसे अभी इससे जुड़े किसी स्कैम के बारे में नहीं सुना गया है। मैं आपको यह सलाह देने से रहा कि आप भी हैसियतवाला बनने के लिए ब्लैकबेरी खरीद लें लेकिन कितना अच्छा हो कि सारी मोबाइल सेवाएं महीने में कम से कम एक हफ्ता बंद रहें तो दिमाग और कान को कुछ फायदा जरूर मिलेगा। पर, यह सुझाव कोई मानेगा नहीं। हम लोगों को जिस तरह अंग्रेज चाय पीने का आदी बनाकर गए हैं वैसे ही मल्टीनैशनल कंपनियों ने इसका आदी बना दिया है। बचकर कहां जाएंगे। एवरेस्ट की चोटी पर भी मोबाइल टॉवर लगाने का प्लान शायद कोई कंपनी बना रही हो।