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Friday, February 19, 2016

देशभक्ति चौराहे पर नुमाइश की चीज नहीं

राष्ट्रप्रेम सिर्फ तिरंगा लहराने से नहीं व्यक्त होता है...यह दिल से महसूस करने की चीज होती है...

देशभक्ति की नुमाइश चौराहों पर नहीं की जाती...सियाचिन के बर्फीले पहाड़ों में की जाती है...

जुमलेबाजी राजनीतिक सभाओं में शोभा देती है...जनता से मजाक करने के लिए नहीं की जाती...

और आज जो खबरों में है...

बीजेपी आईटी सेल की नींव रखने वाले एक्सपर्ट प्रद्युत बोरा ने BJP को नमस्ते कह दिया है...और जाते-जाते प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के काम करने के तरीके पर सवाल भी उठाया है...उनका कहना है कि पागलपन ने पार्टी को जकड़ लिया है...

मित्रों...देशभक्तों...इससे सख्त टिप्पणी तो अभी तक बीजेपी के खिलाफ विपक्ष तक ने नहीं की है। किसी ने पागलपन शब्द का इस्तेमाल बीजेपी के लिए नहीं किया है... हम आईटी एक्सपर्ट को उनके इस शब्द के लिए शाबाशी नहीं दे रहे हैं...क्योंकि जब उन्होंने इस पार्टी को ज्वाइन किया था, तभी हमें लगा था कि इतना जीनियस आदमी भला इस पार्टी में कैसे रहेगा...लेकिन वह दिल की बात दिल में रही...लेकिन बोरा का दर्द बाहर आ गया। इससे पहले प्रशांत किशोर ने भी मोदी का साथ छोड़कर बिहार चुनाव के वक्त नीतीश कुमार का साथ दिया था...अगर अपने-अपने क्षेत्रों के जाने-माने विशेषज्ञ बीजेपी का साथ छोड़ रहे हैं तो इसे क्या माना जाए...जबकि इन लोगों ने ही बीजेपी के उस जुमले को कि --अच्छे दिन आने वाले हैं, हम मोदी जी को लाने वाले हैं --- को घर-घर में पहुंचा दिया था...

...पर, अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। ठीक से काम करो, सरकार चलाओ। आरएसएस की नीतियों के बजाय किसानों के बारे में सोचो...बढ़ती महंगाई के बारे में सोचो, बेरोजगारी के बारे में सोचो, अखंड राष्ट्र की कल्पना को तिलांजलि दे दो, बैंकों को लूटने वाले कॉरपोरेट्स को टॉफियां बांटना बंद कर दो, फर्जी अर्थशास्त्रियों से छुटकारा पा लो...आवारा पूंजीवाद को बढ़ावा मत दो...सब ठीक हो जाएगा...

...और हां कन्हैया से माफी मांग लो, जेएनयू के स्टूडेंट्स से माफी मांग लो...रोहित वेमुला के हत्यारों को सजा दो...देश तुम्हें सरकार चलाने तक माफ कर देगा...माफी मांग कर तो देखो...

बीजेपी के आईटी एक्सपर्ट के इस्तीफे के संदर्भ में पूरी खबर इसी लाइन पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं... 

Tuesday, February 16, 2016

राष्ट्रभक्ति क्या है...क्या सारा ठेका सिर्फ सिर्फ एक पार्टी के पास है ?

देशभक्ति के नाम पर देश में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है...जेएनयू जल रहा है...वहां के स्टूडेंट्स को देशद्रोही बताया जा रहा है...यहां तक कि कुछ पत्रकारों ने इस प्रचार युद्ध को संभाल लिया है कि जो देश की सत्तारुढ़ पार्टी के खिलाफ है, वह देशद्रोही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने से पहले बीजेपी के नेता पूछते हैं कि आप भारत माता के साथ हो या जेएनयू वालों के साथ...कितनी शर्मनाक स्थिति है।

दरअसल राष्ट्रभक्ति क्या है...इस पर मैं कई दिनों से विचार कर रहा था। बार-बार दिमाग में कन्हैया कुमार का चेहरा घूमता रहा, जिसे देशद्रोह के नाम पर जेल में बंद कर दिया गया।

देश के बहुत बड़े कानूनविद और पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी जो अटल बिहारी वाजपेयी के समय एजी थे, उन्होंने आज कहा कि जिस देशद्रोह के आरोप कन्हैया कुमार को बंद कर दिया है, वह कोई आरोप नहीं है। सोराबजी अपने स्पष्ट विचारों के लिए उस वक्त भी जाना जाता था। उनका बयान आप आज के इंडियन एक्सप्रेस में पढ़ सकते हैं। इसके बाद मुझे सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार की फेसबुक वॉल पर जाने का मौका मिला तो वहां उन्होंने एक कहानी के जरिए राष्ट्रभक्ति के बारे में बहुत सुंदर ढंग से बताया है। हिमांशु कुमार की बात आप लोगों तक पहुंचे, उसे बिना संपादित किए बिना यहां मैं आप लोगों के लिए पेश कर रहा हूं...

-हिमांशु कुमार

 

कुछ दिन पहले दिल्ली मैं गया हुआ था ,

अपने दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले भांजे के साथ खाना खा रहा था 
मेरे भांजे नें पूछा क्या अमेरिका के लोग बहुत अच्छे और राष्ट्रभक्त होते हैं 
मैंने कहा कि राष्ट्रभक्ति तो बहुत खराब चीज़ होती है 
यह सुन कर मेरा भांजा चौंक गया 
मैंने उससे आगे कहा कि तुम भारत को दुनिया का सबसे महान और सबसे अच्छा देश मानते हो ना ?
मेरे भांजे नें कहा कि हाँ बिलकुल वो तो है 
मैंने कहा कि तुम इसी लिए भारतीय हो चूंकि तुम्हारा जन्म इत्तिफाक से भारत में हो गया है

 
वो कुछ देर सोचने के बाद बोला कि हाँ बिलकुल सही बात है 
मैंने कहा कि हो सकता है तुम्हारा जन्म पाकिस्तान में हो जाता, या तुम्हारा जन्म बंगलादेश में हो जाता 
तब तुम पाकिस्तानी या बंगलादेशी बन जाते 
वो बोला हाँ ये भी सच बात है 

मैंने पूछा कि अगर तुम्हारा जन्म पाकिस्तान में या बंगलादेश में हो जाता तो फिर तुम किस देश को सबसे महान कहते ?
वो बोला तब अपने देश पाकिस्तान को या बंगलादेश को सबसे महान देश कहता 
मैंने कहा कि इससे यह सिद्ध होता है 
कि असल में ये बिलकुल ज़रूरी नहीं है कि आपका देश महान और अच्छा हो 
और ये भी हो सकता है कि तुम्हारा देश बहुत क्रूर और बुरा देश हो 

इसलिए अपने देश को आँख मूँद कर महान मत कहो 
बल्कि इसमें चलने वाली बुरी बातों को बदलने की कोशिश करो 
यही हर देश के हर जागरूक इंसान की जिम्मेदारी है 
मेरे भांजे नें कहा कि आप जैसी बातें हमें स्कूल में क्यों नहीं पढ़ाई जातीं ? 
मैंने कहा कि तुम्हारा स्कूल तुम्हें सत्य बताने के लिए नहीं चलाया जाता 
बल्कि तुम्हें अमीर उद्योगपति के बिजनेस की गुलामी के लिए तैयार करने के लिए चलाया जाता है 

मेरे भांजे नें वादा किया है कि वो परीक्षा के बाद मेरे पास यह वाली असली विद्या सीखने ज़रूर आएगा 
मुझे लगता है कि जेएनयू पर भी सरकार की कार्यवाही उसी योजना के तहत है 
बड़े उद्योगपति नहीं चाहते कि देश में कोई भी व्यक्ति उनके व्यापार के विरुद्ध आवाज़ उठाये 
बड़े उद्योगपति नहीं चाहते कि जब उद्योगपति अपने उद्योग के लिए आदिवासियों की ज़मीनें छीनें तो पूरे देश में कोई भी विरोध करे 

लेकिन जब छत्तीसगढ़ और उड़ीसा या झारखंड में आदिवासियों की ज़मीनें छीनने के लिए सरकार नें अर्ध सैनिक बलों को भेजा , और सैनिकों नें आदिवासी महिलाओं से बलात्कार किया तो जेएनयू के छात्रों नें उसके खिलाफ़ आवाज़ उठाई 
याद रखिये उस वख्त आदिवासी महिलाओं के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नें कोई आवाज़ नहीं उठाई 
तो संघ , भाजपा या सरकार सब बड़े अमीरों के बिजनेस के एजेंट हैं 
अमीरों के बिजनेस का हित ही इनके लिए राष्ट्र का हित है 

इसलिए कश्मीर में जब हमारे सैनिक दर्दपुरा गाँव की हर महिला के साथ बलात्कार करते हैं 
और दर्दपुरा गाँव की बेटियों की शादी होनी बंद हो जाती हैं 
और जब दर्दपुरा गाँव की महिलाएं मजबूरी में सैनिकों के लिए अपना जिस्म बेचने के लिए मजबूर हो जाती हैं 
तब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उन् पीड़ित कश्मीरी महिलाओं के ह्क़ में कोई आवाज़ नहीं उठाता 
बल्कि अगर कश्मीर के नौजवान गुस्से में बलात्कारी सैनिकों के विरुद्ध नारे भी लगा देते हैं तो 

उन् नारों को देशद्रोह कह कर उन् नौजवानों पर टूट पड़ने का काम संघ और भाजपा करती है 
क्या देश भक्ति का मतलब सेना की भक्ति होती है ?
क्या देश भक्ति का मतलब अमीर बिजनेस के मालिक अदानी, अम्बानी और टाटा की भक्ति होती है ?
नहीं बल्कि असलियत में देश का मतलब है देश के करोड़ों लोग 

देश का मतलब है देश के आदिवासी , देश के दलित देश के अल्पसंख्यक और महिलायें 
इसलिए आदिवासियों ,दलितों अल्पसंख्यकों के ऊपर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाले लोग ही असली देशभक्त हैं 
अत्याचारियों के पक्ष में और अमीर उद्योगपतियों के एजेंट सरकारी अफसर पुलिस वाले या ये संघी असल में देशद्रोही हैं 
तो देशद्रोही लोग असली देश भक्तों के ऊपर हमला कर रहे हैं 
ऐसा हमेशा से होता आया है 
भगत सिंह को भी देशद्रोही कह कर फांसी पर लटका दिया गया था 
आज फिर से ठीक वही हो रहा है 

जे एन यू तो सिर्फ बहाना है 
असल में उद्योगपतियों के विरूद्ध उठने वाली हर आवाज़ को दबाना ही इन फर्ज़ी देशभक्तों का एकमात्र उद्देश्य है 
भारत के नौजवानों को फैसला करना है 
कि मुल्क किसका रहेगा 
इस मुल्क के करोड़ों आदिवासियों , दलितों अल्पसंख्यकों , मजदूरों , किसानों , औरतों का
या इन सब पर ज़ुल्म करने वाले अमीरों के एजेंटों का

 
एनजीओ संभावना, पालमपुर (हिमाचल प्रदेश)

Thursday, February 4, 2016

अखंड राष्ट्र में रोहितों की पिटाई

                                                सबसे पहले लेखक का डिसक्लेमर 

इस सड़ेगले लेख से अगर किसी की भावनाएं आहत हो रही हैं तो उसे दिल पर मत ले। दरअसल इसे चुनावी
मिशन 2019 और उपमिशन यूपी 2017 के मद्देनजर लिखा गया है। यह एक पैगाम है, जहां तक पहुंचे... 

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राष्ट्रवादी देश की राजधानी में साहब का विरोध अगर कोई उसके जन्मदाता मुख्यालय के सामने करेगा तो क्या पुलिस हाथ पर दही जमाकर बैठी रहेगी।...जन्मदाता मुख्यालय की रक्षा आखिरकार पुलिस को ही तो करना है...रोहित वेमुला की आत्महत्या पर जिनका दिल नहीं पसीजा...वे जन्मदाता मुख्यालय की रक्षा कर रहे हैं तो क्या गलत कर रहे हैं...जनता तो राष्ट्रवाद का पैग लेकर नशे में डूब गई है...तो कौन

बचाएगा उस झंडे वाली गली में बने मुख्यालय को...

 
तीन-चार दिन से कलम के लठैत इस मुद्दे पर अखबार से लेकर चैनलों पर मछली बाजार लगाए बैठे हुए हैं।…

 अगर उन लोगों की पिटाई न करते वे लोग तो क्या करते…

 हिंदू को मुसलमान से डर लग रहा है...मुसलमान को हिंदू से डर लग रहा है...दोनों लड़ रहे हैं...इस लड़ाई को रोहित वेमुला की मौत कमजोर करती है, खलल डालती है...रोहित या अन्य खलल डालने वालों की पिटाई राष्ट्रीय कर्तव्य है। हिंदू - मुसलमान का लड़ना, रोहित जैसों का मरना इस महान अखंड राष्ट्र की तरक्की के लिए बहुत जरूरी है...लड़ो-लड़ो खूब लड़ो...पर खबरदार...इनमें से अगर किसी पक्ष ने जन्मदाता मुख्यालय पर जाकर प्रदर्शन किया.... वरना ऐसे ही पिटोगे...देशद्रोहियो... मैं भयंकर खुशी से पागल हो रहा हूं। विडियो देखकर मजा रहा है कि किस तरह रोहित के पैरोकार लड़के-लड़कियां पीटे जा रहे हैं, खाकी वर्दी वाले और कुछ राष्ट्रसेवक तसल्ली से उनकी मरम्मत कर रहे हैं। जिसने इस विडियो को फेसबुक से लेकर जाने कहां-कहां पहुंचा दिया, उसे साधूवाद।...पद्म पुरस्कार पाने का काम किया है बंदे ने।




 

 अछूत लोगों को अकेले लड़ने दो...पता नहीं कहां से ये तथाकथित बुद्धजीवी, सेकुलर लोग जाते हैं और अछूतों के साथ लग जाते हैं। ये सारे मिलकर कट्टर सोच वालों की आपसी लड़ाई में रोड़ा खड़ा करते हैं। मूर्खों को इतना भी नहीं मालूम कि अभी कुछ राज्यों में चुनाव होने हैं, तमाम रोहितों का मरना और हिंदू-मुसलमान का आपस में लड़ना इन चुनावों के लिए कितना जरूरी है। मेरा बस चले तो खलल डालने वालों को चलती चक्की में या जलती भट्ठी में डाल दूं। कमबख्त ऐन मौके पर काम खराब कर देते हैं। इन बेवकूफों को इतना भी नहीं मालूम कि मुसलमान-दलित अगर एक मंच पर गए तो राष्ट्रवादी ताकतें कितना कमजोर हो जाएंगी। बेचारे हिंदू-मुसलमान आपस में लड़कर जिस ऊर्जा का संचार करते हैं, ये कमबख्त सेकुलर लोग आपस में मिलकर उसे खराब कर देते हैं।

आप लोगों को याद होगा...अभी ज्यादा दिन नहीं हुए। पुरस्कार वापसी का सिलसिला इन्हीं बेवकूफों ने चलाया था। उसमें भी ये सारे और इनके साथ मुसलमान और दलित लेखक, पत्रकार, कलाकार मिलकर ढपली बजाने लगे। साहब दबाव में गए। मुख्यालय दबाव में गया। राष्ट्रवादी कमजोर होने लगे। देश की अस्मिता खतरे में पड़ गई। ...और सामाजिक समरसता...उसे भी गंगा मैया बहा ले गईं...

 ...लेकिन इस रोहित वेमुला का क्या किया जाए...इस को अभी क्यों मरना था। कुछ दिन और जी लेता तो क्या जाता इसका। अरे इस देश के बहरे लोग वैसे भी हालात बदलने को राजी नहीं हैं तो ऐसे लोगों के लिए क्या मरना लल्लू प्रसाद। गलत किया। राष्ट्रवादियों की लड़ाई को कमजोर कर दिया। बताओ, ठीक से ये भी नहीं मालूम किसी को कि तुम दलित थे या नहीं...तुम्हें प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ रही है। वो

बार-बार बहरे देशवासियों को बता रहे हैं कि रोहित दलित नहीं था...यानी जो लोग इसे दलित बनाम कुछ और लड़ाई का रूप देना चाहते हैं, बहरे देशवासी उनके बहकावे में नहीं आएं। उनकी यह कोशिश बहुत उचित है। क्योंकि बहरे लोग कान के कच्चे भी होते हैं, जाने किस तरफ चल पड़ें। यानी थैली के बैंगन की तरह, जिधर भी लुढ़क लिए।

 राष्ट्र को अखंड बनाने के लिए रोहितों का जिंदा रहकर हाशिए पर पड़े रहना और हिंदू-मुसलमान का लड़ना बहुत जरूरी है। राष्ट्र तभी अखंड बनेगा, जब लोग धर्म के नाम पर लड़ मरेंगे। वो कौन कह गया था भला कि धर्म नहीं बचेगा तो कुछ भी नहीं बचेगा। देखा नहीं, कैसे उस धर्म के पैरोकारों ने नया राष्ट्र खड़ा कर लिया और उन पैरेकारों को खत्म करने के लिए तमाम राष्ट्र मिलकर नूरा कुश्ती लड़ रहे हैं। अकेला धर्म ही अब अफीम नहीं रहा, धर्म सत्ता के साथ मिलकर सुपर अफीम बन गया है। ...तो राष्ट्र भक्तों तुम्हारा रास्ता सही है। रोहितों को पीटो, उन्हें खुदकुशी के लिए मजबूर करो, इनके पैरोकार स्टूडेंट्स को पीटो, सेकुलरों को पाकिस्तान या जहन्नुमिस्तान भेजो।

 तभी अपना राष्ट्र अखंड बना रहेगा। तो आओ इसी बात पर, अखंड राष्ट्र के नाम पर बाबा जी के कारखाने में बने शरबत का एक-एक जाम हो जाए...