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Wednesday, October 7, 2015

मेरे समय की कविता

By Himanshu Kumar...

तो , मोदी की जय हो...
 
लो बन जाता हूं मैं भी एक अच्छा नागरिक,
तो , मोदी की जय हो ,
अंकित गर्ग की जय हो ,
चिदम्बरम की जय हो ,
 
मैं कहूँगा ,
मुसलमान गद्दार हैं ,
आदिवासी नक्सली हैं ,
दलित कामचोर और गंदे होते हैं ,
अमीर अपनी मेहनत से अमीर बने हैं ,
गरीब अपने आलस के कारण गरीब हैं ,
 
तो बोलो , गुजरात के विकास की जय हो,
सलवा जुडूम की जय हो ,
पाकिस्तान को मिटा दो ,
कश्मीरियों को उडा दो,
गुजरात जैसा सबक सारे देश के मुसलमानों को पढ़ा दो ,
सेक्युलरिस्ट बुद्धीजीवियों को जेलों में सड़ा दो ,
 
बाबा रामदेव ,आसाराम बापू की जय हो ,
त्रिशूल की जय हो ,
गोडसे की जय हो ,
 
ब्राम्हणों के शुद्ध् वंश की जय हो,
टाटा की जय हो , अम्बानी की जय हो
फौज की जय हो,
पुलिस की जय हो ,
सरकार की जय हो ,
 
औरतो को सिर चढाने वाले ,
मुसलमानों के सामने हाथ जोड़ने वाले ,
नक्सलियों के एजेंट ,
साले बुद्धिजीवियों को सबक सिखा दो,
 
भाजपा को वोट दो,
संघ से संस्कार सीखो ,
सच्चे भारतीय बनो ,
गो मूत्र पियो ,
मुंह पर गाय का गोबर मलो 
राम मंदिर के निर्माण के लिये खुल कर सहयोग करो ,
 
मोदी को प्रधान मंत्री 
बनाए रखने की 
मुहीम से जुड़ें
और हमारी तरह
देश के अच्छे नागरिक बने .
 
 
नोट - हिमांशु कुमार पालमपुर में संभावना संस्थान चलाते हैं। उनकी फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक वह मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं।
 
 

Friday, October 2, 2015

गर्म हवा...

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके जन्म दिन पर समपर्पित मेरी यह कविता, जिसे खास तौर पर मैंने आज ही

लिखी...



                   गर्म हवा...


बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं
पहनते हैं खादी, जुमलेबाजी में उम्दा हैं
                                           
कहता है खुद को अहिंसा का पुजारी
लेकिन जान ले रहा इंसान की दुराचारी

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

कितनी गर्म हवा चल रही है अपने देश में
गली-गली हत्यारे घूम रहे हैं साधू के वेश में

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

कर्ज है सिर पर, बेड़ी है किसान के पांव में
बड़े साहब ला रहे हैं इंटरनेट, फेसबुक गांव में

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

दाभालोकर, पनसारे शहीद हो गए सच की राह में
अभी और आएंगे कई मसीहा शहादत की चाह में

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

राम-रहीम अब न बोले तो कब बोलोगे, अब न निकले घरों से तो कब निकलोगे
मिटा दो खुद को हर जुल्म के खिलाफ, वरना बाद में तो हाथ मलते रह जाओगे

बापू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं...

   
copyright@yusuf kirmani

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