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Thursday, December 17, 2015

दोस्तों...अमीरी कैसे बढ़ती है

जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार की कलम से
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रिजर्व बैंक एक पत्र लिख कर उस बैंक को देगा जिसमें भारत सरकार का खाता है
मान लीजिये स्टेट बैंक में भारत सरकार का खाता है
तो रिजर्व बैंक से स्टेट बैंक को एक पत्र आएगा कि भारत सरकार के खाते में नब्बे लाख करोड़ लिख दीजिये
तो भारत सरकार मानेगी कि उसके पास अब पैसा आ गया

अब भारत सरकार उस पैसे को
लोहा कंपनियों को देगी जिनसे उसे रेल पटरियां डालने के लिए लोहा खरीदना है
लोहा कंपनी उसे अपने कर्मचारी के खाते में डालेगी
कर्मचारी उस से कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और यातायात के साधन, खरीदेगा
कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और यातायात के साधन, तो देश में बढे नहीं

लेकिन नब्बे लाख रुपया बढ़ गया
जो बढ़ जाता है उसकी कीमत कम हो जाती है
रुपया बढ़ा तो रूपये की कीमत कम हो जायेगी
जो नहीं बढ़ा उसकी कीमत बढ़ जाती है
कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और यातायात के साधन, की कीमत बढ़ जायेगी
साथ में दाल सब्जी मछली दूध की कीमत भी बढ़ जायेगी
जिसे आप कहेंगे कि महंगाई बढ़ गयी

बिना उत्पादन बढ़ाये अगर आप
पैसा बढ़ाएंगे
तो उससे महंगाई बढ़ेगी
चलिए आगे चलते हैं
दाल सब्जी मछली दूध महंगा हो जाएगा तो जनता शोर मचाएगी

सरकार उस रूपये से
दाल सब्जी मछली दूध विदेशों से मंगवायेगी
उससे किसान द्वारा उगाये गए
दाल सब्जी मछली दूध की कीमत फिर से गिर जायेगी
लेकिन किसान के लिए कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और यातायात के साधन, की कीमत तो कम नहीं हुई
तो किसान के पास दाल सब्जी मछली दूध के उत्पादन से अब जो रुपया आएगा उससे उसका जीवन चलाना मुश्किल हो जाएगा

किसान अपने बच्चे को पढ़ा नहीं सकेगा, इलाज नहीं करा सकेगा
किसान इस सब के लिए क़र्ज़ लेगा
लेकिन उसका उत्पादन तो बढ़ा नहीं
महंगाई बढ़ने से खर्च तो बढ़ गया

...लेकिन आमदनी बढ़ी नहीं
किसान घाटे में आ जाएगा
किसान क़र्ज़ चूका नहीं पायेगा
किसान फांसी लगा लेगा

यह अर्थव्यवस्था
उत्पादक के पक्ष में काम ही नहीं करती


Thursday, December 10, 2015

आसमान पर शैतानी पतंगें




आओ पतंग उड़ाना सीखें

कानून के हाथ से पतंग की डोर लंबी होती है

वह डोर बांध लेती है अपने मोहपाश में सभी को

नेता को, अभिनेता को, दलाल को, इंसाफकारों को

उसके पेच में फंस जाते हैं सब

फुटपाथ पर सोने वाले भी दम तोड़ देते हैं इसमें अक्सर फंसकर

उन्हें पता नहीं होता, उड़ाने वाला तो कहीं और बैठा होता है छिपकर

फंसता है जब पतंगबाज तो कानून, नेता बचाने निकल पड़ते हैं मिलकर   

पतंगों की जाल में उलझा है यह देश

तरह-तरह की शक्ल वाली पतंगें हैं आसमान पर

मुद्दों से भटके देश में शैतानी पतंगें हैं आसमान पर

असहनशीलता, नाइंसाफी, दंगाइयों की पतंगें हैं आसमान पर

आखिर किस रहबर पर ऐतबार है हम सब को

क्यों इंसाफ का इंतजार 'यूसुफ किरमानी' है तुमको