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Wednesday, August 10, 2016

मेरा गोबरमय भारत का सपना


जिस स्कूल में हमारी पढ़ाई हुई, वहां हमारे गुरुजन अक्सर जुमला बोला करते थे कि तुमको कुछ आता भी है या गोबरगनेश हो।...सारा गुड़गोबर कर दिया।...तब हमारी समझ में यही आता था कि गोबर कोई खराब चीज है, तभी मास्टरजी बार-बार उसी की याद दिलाते हैं।...
...लेकिन गोबर का जो नया परिचय आरएसएस से जुड़े संगठन अखिल भारतीय गो सेवा संघ के अध्यक्ष शंकरलाल ने कराया। उसके बाद तो लगता है कि मोबाइल (Mobile) चार्जर बनाने वाली और बैटरी बनाने वाली कंपनियों पर ताला लगने वाला है। उन्होंने अपने मोबाइल हैंडसेट पर गऊ माता का गोबर (Cow Dung) लगाया और कहा कि गोबर इसकी रेडिशन (रेडियोधर्मी किरणें) से बचाता है। उन्होंने ये भी कहा कि मोबाइल को गाय के गोबर से खासी एनर्जी मिल सकती है। इतनी की उसकी बैटरी चार्ज करने की जरूरत ही न पड़े।

फिर मैंने जब गोबर पर सोचना शुरू किया तो मुझे पूरी रात गोबरमय भारत का सपना आता रहा।...
...मैं देख रहा हूं कि कैसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री गोबर का तिलक लगाकर विदेशी मेहमानों का स्वागत कर रहे हैं। ...कैसे हमारे पहलवान रियो (Rio) में गोबर मलकर दूसरे देश के पहलवानों को चारों खाने चित्त कर मेडल की बारिश कर रहे हैं।...कैसे हमारी फ्लाइट्स गोबर के ईंधन से आसमान पर उड़ान भर रही हैं।
...कैसे मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन (Bullet Train) गोबर के पावर से चल रही हैं और इस तरह करोड़ों का ईंधन बचाया जा रहा है। ...रिलायंस (Reliance) अडानी (Adani) से कहा गया है कि वे गोबरनिष्ठ उत्पाद बनाएं...मथुरा में साध्वी ऋतंभरा के आश्रम को कई अरब डॉलर के गोबर निर्यात का आर्डर मिला है।...जेल में बंद एक साध्वी ने गोबर द होली बुक (Gobar The Holy Book) लिखने का फैसला किया है, जिससे भारत के युवाओं को गोबरमय भारत का विरोध करने वालों से लड़ने के लिए तैयार किया जा सके।
...एक राजनीतिक दल के मार्गदर्शक मंडल ने फैसला किया है कि वे गोबर महायज्ञ कराकर केंद्र में तख्ता पलट की कोशिश करेंगे। इसके लिए शत्रुघन सिन्हा को जरुरी निर्देश दिए गए हैं।...यूपी चुनाव जीतने की हसरत रखने वाले एक गुजराती व्यापारी ने जगह-जगह दलितों पर गोबर कार्ड खेलने का फैसला किया है।...राहुल गांधी ने गोबर यात्रा निकालने का निर्देश अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को दिया है।
...नागपुर स्थित एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन ने अपने स्वयंसेवकों से सिर्फ गोबर लीपित नेकर पहनने का आदेश जारी किया है।... असाउद्दीन ओवैसी ने कहा है कि वे अपनी गोबर शक्ति के जरिए आईएस के टुकड़े-टुकड़े करके रहेंगे।...जाकिर नाइक ने कहा है कि वे अब मुस्लिम युवकों को गोबर से निर्मित चीजों के इस्तेमाल के लिए उपदेश देंगे।
...आम आदमी पार्टी के चीफ केजरीवाल ने एलजी से रिश्ते मधुर बनाने के लिए गोबर से निर्मित मिठाई एलजी दफ्तर भेजने का निर्देश मनीष सिसोदिया को दिया है।...मायावती (Mayawati) ने बसपा टिकट चाहने वालों से कहा है कि वे नसीमुद्दीन सिद्दीकी से संपर्क कर पार्टी खाते में गोबर दान के लिए अपना नाम दर्ज कराएं।...मुलायम ने अखिलेश से साफ-साफ कह दिया है कि अब सब गुड़गोबर होने वाला है। आजम खान की भैंसों के गोबर से भी कुछ काम नहीं बनने वाला।
...सलमान खान (Salman Khan) ने अपने नए एनजीओ का नाम बीइंग गोबरगनेश रखने का फैसला किया है।...शाहरुख खान (SRK) ने फरहा खान से गोबर केंद्रित कहानी पर फिल्म बनाने और उन्हें भूमिका देने को कहा है।...योग गुरू रामदेव (Ramdev) ने सिर्फ गोबर से निर्मित प्रोडक्ट बनाने का फैसला किया है और आमिर खान (Aamir Khan) से ब्रैंड एंबैस्डर बनने का अनुरोध किया है।  
...एचआरडी मंत्रालय ने दीनानाथ बत्रा से कहा है कि वे गोबर के महत्व पर, इसके इतिहास पर, वेदों में गोबर वर्णन पर अनुसंधान करवाकर उसे पाठ्यपुस्तकों में लागू कराएं। इनके अलावा सभी विश्वविद्यालयों में गोबर चेयर स्थापित करने को भी कहा गया है। यूजीसी को निर्देश दिया जा रहा है कि जो विश्वविद्यालय गोबर चेयर स्थापित नहीं करेंगे, उनकी ग्रांट रोक ली जाएगी। ...जेएनयू (JNU) स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने इसका कड़ा विरोध करते हुए गोबर से आजादी का गीत गंगा ढाबे पर गाने का आह्वान सभी स्टूडेंट्स से किया है। ...छी न्यूज चैनल ने अपनी कैमरा टीम को इस बार सावधानी बरतने का निर्देश देते हुए सिर्फ उसी हिस्से की फिल्म बनाने को कहा है जिनसे साबित किया जा सके कि गोबर से आजादी का गाना पाकिस्तान में लिखा गया और दरअसल कन्हैया पाकिस्तानी एजेंट है जो गोबर से आजादी की बात कह रहा है।
...अचानक गली से गोबर ले लो...ताजा गोबर ले लो....एनर्जी वाला गोबर ले लो... जैसी आवाजें आती हैं। ...मैं खिड़की से गली में झांकता हूं तो कोई भी गोबर बेचता नजर नहीं आता।...अब मैंने फिर से सोचना शुरू कर दिया है कि शंकरलाल का नाम गोबर वैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए। अब्दुल कलाम के बाद शंकरलाल को गोबर रिसर्च के लिए भारत रत्न तो मिलना ही चाहिए। काश, हम लोग गोबर का महत्व पहले जान जाते तो जिन मुस्लिम आक्रमणकारियों ने बारूदी तोपों से भारत पर हमला किया था तो उस वक्त हम लोग उन्हें गोबर के कारतूस से परास्त कर देते।...पता नहीं शंकरलाल जी के पूर्वजों ने उस समय बारुद के मुकाबले गोबर के इस्तेमाल के बारे में क्यों नहीं सोचा।  
...तभी तिलकधारी जी का कमरे में प्रवेश होता है। दाने-दाने में...दम वाला गुटखा मुंह में दबाए वो सिर्फ इतना बोल पाते हैं कि ...अबकी बार गोबर सरकार।...मेरी नींद टूट जाती है और मैं दफ्तर दैनिक गोबर एक्सप्रेस (Daily Gobar Express) जाने के लिए तैयार होने लगता हूं।

Monday, August 1, 2016

आओ चलो टिम्बर की खेती करें


आओ, चलो #टिम्बर की खेती करें
गेहूं, धान बोने की जरूरत क्या है
टिम्बर है तो जीवन में अंबर है
बिना टिम्बर जीवन भयंकर है
आओ, चलो टिम्बर की खेती करें
गन्ना, #अरहर बोने की जरूरत क्या है
टिम्बर है तो जीवन कलंदर है
बिना टिम्बर जीवन समंदर है
आओ, चलो टिम्बर की खेती करें
साग, सरसों बोने की जरूरत क्या है
टिम्बर है तो जीवन #हिंदुस्तान है
बिना टिम्बर जीवन #पाकिस्तान है
आओ, चलो टिम्बर की खेती करें
मक्का, बाजरा बोने की जरूरत क्या है
टिम्बर है तो जीवन #गाय है
बिना टिम्बर जीवन चाय है
आओ, चलो टिम्बर की खेती करें
ज्वार,ग्वार बोने की जरूरत क्या है
टिम्बर है तो जीवन फलित है
बिना टिम्बर जीवन #दलित है
आओ, चलो टिम्बर की खेती करें
टमाटर, आलू बोने की जरूरत क्या है
टिम्बर है तो जीवन #मनकीबात है
बिना टिम्बर जीवन पेट पर लात है
आओ, चलो टिम्बर की खेती करें
खेत, खलिहान की जरूरत क्या है
टिम्बर है तो जीवन #अडानी है
बिना टिम्बर जीवन #किरमानी है
संदर्भ ः यह कविता #प्रधानमंत्री नरेंद्र #मोदी के मन की बात के ताजा प्रसारण में आए टिम्बर के संबंध में है। प्रधानमंत्री ने देश के किसानों को सलाह दी है कि वे टिम्बर की खेती करें। टिम्बर के लिए सफेदे के पेड़ लगाने पड़ते हैं और ऐसे पेड़ जमीन के पानी को खींच लेते हैं और वो जमीन बंजर हो जाती है। टिम्बर अंग्रेजी का शब्द है, जिसका मतलब लकड़ी होता है। किसान कितनी सलाह मानेंगे या आप इसका क्या संदर्भ लेंगे...लेकिन जो लोग गांव-खेत से जुड़े हैं वो जानते हैं कि टिम्बर की खेती से कभी #भारत की #गरीबी नहीं दूर होने वाली।



Sunday, July 31, 2016

एक महीने बाद फराज का बांग्लादेश

...मेरा ये लेख आज के नवभारत टाइम्स लखनऊ संस्करण में प्रकाशित हो चुका है। ईपेपर का लिंक लेख के अंत में है।...


बांग्लादेश में एक महीने बाद भी लोग ढाका के रेस्तरां में हुए हमले से उबर नहीं पाए हैं। 1 जुलाई 2016 को यहां आतंकवादियों के हमले में 28 लोग मारे गए थे। इन्हीं में था बांग्लादेशी स्टूडेंट फराज हुसैन, जिसने अपने साथ पढ़ने वाली भारतीय लड़की को बचाने के लिए जान दे दी। फराज का परिवार दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली आतंकी घटना पर अभी भी सिहर उठता है। फराज के बड़े भाई जरेफ हुसैन ने फोन पर ढाका से एनबीटी से कहा कि ...लगता है कि आईएस के आतंकियों ने इस्लाम का अपहरण कर लिया है और वो कोई पुराना बदला चुकाने के लिए लोगों को मार रहे हैं।

जरेफ हुसैन कहते हैं कि जब हमसे हमारी सबसे प्यारी चीज ही छीन ली गई तो बताइए ऐसे आतंकियों के लिए हम क्यों दिल में साफ्ट कॉर्नर रखें। इन आतंकियों ने सिर्फ हमारे परिवार को मुश्किल में नहीं डाला है बल्कि पूरे इस्लाम को ही खतरे में डाल दिया है। आईएस आतंकियों का मकसद लोगों को मार कर धर्म को मजबूत करना नहीं है बल्कि वो इसकी आड़ में इस्लाम को ही बर्बाद कर देना चाहते हैं।

उनका कहना है कि बांग्लादेश भी एक सेकुलर मुल्क है। हमारा कल्चर भारत के पश्चिम बंगाल से मिलता है। हम लोग बांग्ला बोलते हैं। बांग्लादेश में कितने ही भारतीय बिजनेसमैन आकर बिजनेस करते हैं। न उन्होंने कोई फर्क समझा न हमने कोई फर्क समझा। कट्टरपन किसी भी मुल्क को हर तरह से बर्बाद कर देता है। 1 जुलाई की घटना ने बांग्लादेश की छवि को धूमिल कर दिया है।

इस घटना के बाद बांग्लादेश के लोगों में एक बड़ा बदलाव आया है। यहां का पढ़ा-लिखा और मध्यवर्गीय तबका विदेशियों को हमदर्दी की नजर से देखता है। अमेरिकन इंटरनैशनल स्कूल ढाका के टीचर रसेल विलियम्स ने फराज हुसैन, तारिषी जैन और अंबिता कबीर को पढ़ाया है। वो बताते हैं कि घटना के दो दिन बाद जब वो अमेरिकन क्लब जा रहे थे तो रास्ते में एक एटीएम पर पैसा निकालने के लिए रुके। इतने में बगल की मशीन पर एक बांग्लादेशी युवक भी आकर पैसा निकालने लगा। हम दोनों साथ-साथ बाहर निकले। बाहर आकर उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा कि आई एम सॉरी। ...लगा कि जैसे अभी रो देगा। फिर बोला, प्लीज हमें माफ कर देना। हमारा बांग्लादेश ऐसा नहीं है।...उस युवक को मैं नहीं जानता हूं। लेकिन लगता है कि वो शख्स आम बांग्लादेशी मुसलमान का प्रतिनिधित्व करता है।...वो जानता है कि आतंकवाद की एक आम इंसान को और उसके देश को क्या कीमत चुकानी पड़ती है।

रसेल ने फराज हुसैन को याद करते हुए कहा कि वह सही मायने में एक अच्छा मुसलमान लड़का था। उसने तारिषी और अंबिता को बचाने के लिए वही किया जो एक अच्छे मुसलमान को करना चाहिए था। उसके एक्शन से पता चलता है कि वो एक अच्छे कल्चर और एक अच्छी फैमिली से आया हुआ मुसलमान लड़का था। मुझे यकीन नहीं होता कि कैसे लोग आम मुसलमानों के बारे में गलत धारणा बना लेते हैं। आतंकवादियों के साथ इस्लाम या हर मुसलमान को जोड़ना न सिर्फ गलत है बल्कि बेवकूफी भी है। रसेल कहते हैं कि ढाका के उस रेस्टोरेंट में जब आतंकवादी अल्लाह-ओ-अकबर कहते हुए सबको मार रहे थे और कुरान की आय़त सुनाने को कहते थे तो फराज ने भी आयत सुनाई। आतंकियों ने उसे जाने को कहा लेकिन उसने साफ कहा कि वो तारिषी और अंबिता को छोड़कर नहीं जा सकता। उन्होंने तीनों का मार दिया। ...सोचकर देखिए। अपनी जान किसको नहीं प्यारी होती। वो चाहता तो खुद को बचा लेता। उसे पता था कि कोई उसे उन दोनों की मौत का जिम्मेदार नहीं ठहराएगा। लेकिन उसके धर्म ने उसे बताया था कि किसके साथ खड़े होना है और वो इंसानियत के साथ खड़ा रहा।

फराज को हाल ही में मिलान (इटली) की एक संस्था गार्डेन आफ राइटियस ने मरणोपरांत सम्मानित किया है। फराज की मां सिमीन हुसैन ने उस संस्था को लिखे पत्र में खुद को प्राउड मदर आफ फराज लिखा है। सिमीन हुसैन बांग्लादेश की सबसे बड़ी दवा कंपनी इस्कायफ (Eskayef) की एमडी व सीईओ हैं। वह कहती हैं कि मैं प्राउड इसलिए महसूस करती हैं कि मेरा बेटा दूसरों के लिए जीया, अपने लिए। वो बहादुरी से शहीद हुआ। वो धर्म की आड़ में वहां से मुंह छिपाकर भागा नहीं। ऐसे बहादुर बेटे की मां को न सिर्फ प्राउड है, बल्कि मैं दुनिया की ऐसी सबसे खुशनसीब मां हूं, जिसने उसे जन्म दिया।...जिंदगी तो चलती रहेगी लेकिन मेरा फराज उन अमानवीय आतंकियों के मुंह पर तमाचा मारकर चला गया।

बता दें कि फराज के नाना का बांग्लादेश का सबसे बड़ा बिजनेस एंपायर ट्रांसकॉम ग्रुप (Transcom Group) के नाम से जाना जाता है। जिसके तहत 30 कंपनियां आती हैं, जिनमें करीब दस हजार लोग काम करते हैं। इन कंपनियों को फराज का परिवार भी संभालता है।


नोट ः ये लेख नवभारत टाइम्स लखनऊ संस्करण में आज प्रकाशित हुआ है..वहां पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं...




Sunday, July 17, 2016

सोशल मीडिया का अनसोशल खेल


जिस सोशल मीडिया (Social Media) की बदौलत सरकारें गिराने और बदलने के दावे कल तक किए जा रहे थे, वो दावे अब खाक होते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म की लगभग सारी साइटों को चूंकि बिजनेस करना है, इसलिए उन्हें अलग-अलग देशों में वहां की सरकार के सामने घुटने टेकने पड़ रहे हैं। हाल ही में फेसबुक (Facebook) और ट्विटर ने अपनी साइट से 70 फीसदी ऐसा कंटेंट हटाया है जो इस्राइल के खिलाफ फलस्तीन के संघर्ष को बताता है। इस्राइल (Twitter) की कानून मंत्री आयलेट शाकेड ने वहां की संसद में हाल ही में घोषणा की कि आखिरकार हम अपने मकसद में कामयाब हो गए। फेसबुक और ट्विटर 70 फीसदी फलस्तीनी कंटेंट हटाने को राजी हो गए हैं।

उन्होंने संसद में जो लाइन पढ़ी, उसमें कहा इस्राइल को फेसबुक, ट्विटर और गूगल (Google) से काफी सहयोग मिला है और हमें ये कहते हुए खुशी हो रही है कि तमाम सोशल मीडिया साइटों से इस्राइल विरोधी लाखों पोस्ट, अकाउंट, विडियो हटा दिए गए हैं। आयलेट की घोषणा से पहले ये आऱोप लगते रहे हैं कि फेसबुक, ट्विटर के अलावा गूगल पर इस बात का दबाव है कि वो अपने-अपने प्लैटफॉर्म औऱ सर्च इंजन (Search Engine) से उस कंटेंट को हटाए जिनसे लोगों को फलस्तीनी संघर्ष को लेकर सहानुभूति न पैदा हो। ज्यादातर कंटेंट का संबंध इस्राइली सेना का फलस्तीनियों पर किए जा रहे जुल्म से संबंध था। फलस्तीनी बच्चों की बेरहमी से पिटाई, उनको गोली मारने जैसे विडियो सोशल मीडिया पर उपलब्ध थे। हालांकि फेसबुक, ट्विटर बीच-बीच में घोषणा करते रहे कि वे किसी भी सरकार के आगे नहीं झुकते हैं। लेकिन इस्राइली कानून मंत्री की घोषणा का खंडन अभी तक इन साइटों ने नहीं किया है।

 इस घटनाक्रम से पहले इस्राइल ने सैकड़ों की तादाद में ऐसे फलस्तीनियों की गिरफ्तारी की, जिनका फेसबुक या ट्विटर अकाउंट था। ये लोग इस्राइली कब्जे वाले फलस्तीनी इलाके में रहते हैं। बेथलहम जिले में इस्राइली कब्जे वाले वेस्ट बैंक की माजिद यूसिफ अटवन (22) को उसके फेसबुक पोस्टों की वजह से 45 दिन जेल की सजा सुनाई गई और 794 यूएस डॉलर का जुर्माना लगाया गया। अटवन को 19 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। अटवन मूलतः स्वतंत्र फोटोग्राफर हैं और उन्हें फोटो खींचने के दौरान इस्राइली सेना की जो बेरहम नजर आती थी, वे बहुत आसानी से उसको फेसबुक पर बयान कर देती थीं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस्राइल ने सैकड़ों की तादाद में इंटरनेट (Internet) मॉनिटर करने वाले कर्मचारियों को रखा हुआ है जो इस तरह की सूचनाएं जमा करते हैं या उसे काउंटर करते हैं। फेसबुक, ट्विटर, गूगल ने बिना किसी पड़ताल के इन्हीं कर्मचारियों की सूचना पर ऐसे सारे कंटेंट हटाए। फलस्तीन के स्वतंत्र फोटो जनर्लिस्ट निहाद तवील का फेसबुक अकाउंट देखेंगे तो पाएंगे कि उनके फेसबुक अकाउंट से काफी तस्वीरें गायब हो गई हैं। देश-विदेश के तमाम पत्रकार निहाद की फेसबुक वॉल पर जाकर उन तस्वीरों के माध्यम से फलस्तीन की असली तस्वीर देखते थे। हम उस फलस्तीन को जान लेते थे जिसे पश्चिमी मीडिया इस्राइल के प्रभाव में दुनिया को बताना नहीं चाहता। लेकिन अब सोशल मीडिया का प्लैटफॉर्म भी कुंद कर दिया गया है।

 

फेसबुक, ट्विटर सिर्फ इस्राइल के ही दबाव में नहीं आए हैं। वे भारत में भी अक्सर दबाव में आ जाते हैं।

स्क्रिट राइटर. प्रोड्यूर और स्टैंडअप कॉमिडियन तन्यमय भट का लता मंगेशकर का मजाक उड़ाने वाला विडियो जब एआईबी ने मई में जारी किया तो मुंबई पुलिस ने फेसबुक, गूगल और यूट्यूब से आग्रह किया कि इस विडियो को हटा दिया जाए। इससे करोड़ों भारतीयों की भावनाएं आहत हो रही हैं। यह तो पता नहीं कि फेसबुक, गूगल और यूट्यूब ने इस पर क्या स्टैंड लिया लेकिन वो विडियो गायब हो गया। पता नहीं इसे फेसबुक और यूट्यूब ने खुद हटाया या फिर एआईबी ने हटाया लेकिन इस पर फेसबुक ने कभी जबान नहीं खोली।

पिछली कांग्रेस सरकार के समय जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह औऱ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के फोटोशॉप से बनाए गए चित्र, विडियो और कॉर्टून फेसबुक पर ज्यादा आए, उस वक्त भी भारत सरकार ने फेसबुक से शिकायत की थी। उसके बाद उनमें कमी आ गई थी। उस वक्त मौजूदा बीजेपी विपक्ष में थी और उसने सोशल मीडिया का इस्तेमाल बहुत बेहतर ढंग से किया था। आज भी यह कहा जाता है कि बीजेपी की जीत में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही है। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अमेरिका यात्रा के दौरान सिलकॉन वैली में फेसबुक के मुख्यालय भी जा पहुंचे थे। यह मुलाकात तो एक बहाना थी, फेसबुक ने नेट न्यूट्रिलिटी का अभियान छेड़ा हुआ था। भारत में लोग मान चुके थे कि फेसबुक अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा लेकिन भारत में इस अभियान के विरोध में चले अभियान के बाद फेसबुक को झुकना पड़ा।

खतरे और भी हैं

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अगर भारत में विदेशी सोशल मीडिया के जवाब में यहां का सोशल मीडिया खड़ा करने की कोशिश होगी, तो भी उसकी वो धार नहीं रहेगी जो फेसबुक, ट्विटर और दूसरे साइट्स की हैं। सर्च इंजन की ताकत गूगल, माइक्रोसाफ्ट और याहू के पास है। अगर आपकी साइट इन तीनों सर्च इंजन में नहीं है को आप कहीं नहीं हैं। आप चाहे जितनी टॉप क्लास साइट बना लें। कुल मिलाकर सोशल मीडिया के गेम बड़े खिलाड़ी खेलेंगे। इसमें कभी समझौते होंगे तो कभी धमकी भी दी जाएगी। आप फेसबुक, ट्विटर पर कुछ भी पोस्ट करके भले ही मुगालता पाले रहें।