अमेरिका का तेल साम्राज्यवाद: वेनेजुएला से भारत तक ट्रंप की दादागीरी
America Oil Imperialism: Venezuela, Trump and Global Politics अमेरिका की विदेश नीति को अगर एक लाइन में समझना हो, तो वह है- तेल पर नियंत्रण, दुनिया पर नियंत्रण। तेल आज केवल ऊर्जा नहीं, बल्कि सत्ता की रीढ़ है। जिस देश के पास तेल है, वह स्वतंत्र रह सकता है। और यही बात अमेरिका को सबसे ज़्यादा खटकती है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने योजनाबद्ध तरीके से वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था को अपने नियंत्रण में लिया। पेट्रो-डॉलर सिस्टम के तहत तेल की खरीद-बिक्री डॉलर में अनिवार्य की गई, ताकि दुनिया अमेरिका की मुद्रा पर निर्भर रहे। नतीजा यह हुआ कि तेल उत्पादक देश अमीर होने के बावजूद राजनीतिक रूप से गुलाम होते चले गए। मध्य-पूर्व, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका- जहाँ भी तेल है, वहाँ अमेरिकी दखल है। यह संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी साम्राज्यवादी रणनीति है। अमेरिका तेल इकोनॉमी पर कब्जा क्यों करना चाहता है? अमेरिका खुद तेल उत्पादक है, फिर भी वह दूसरों के तेल पर नज़र रखता है, क्योंकि: तेल की कीमतें अगर उसके नियंत्रण में हों, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था उसके इशारों पर चलती है। रूस, ईरान, वेनेजुएला जैसे देश तेल स...