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Wednesday, October 8, 2008

क्षमा चाहता हूं


पता नहीं ब्लॉग स्पॉट डॉट कॉम (BLOGSPOT.COM) वालों को क्या लगा कि उन्होंने मेरे ब्लॉग को लॉक कर दिया है। इस दौरान कई लोग आए और यूं ही लौट गए, कुछ ने वहां संदेश पढ़ने के बाद ब्लॉग को explore किया।
माजरा क्या है – ब्लॉग स्पॉट डॉट कॉम को लग रहा है कि इस ब्लॉग पर spaming करने के लिए लिंक दिए गए हैं, क्योंकि सारे लिंक एक ही साइट पर जा रहे थे। दरअसल, यह चिट्ठाजगत की वजह से हुआ, जिसके कई सारे लिंक मेंने यहां अलग-अलग वजहों से दिए थे लेकिन अब एक लिंक को छोड़कर बाकी सब हटा लिया है। ब्लॉग स्पॉट को भी इस बारे में सूचित किया गया है, अब देखना है कि भाई लोग कब ताला खोलते हैं जिससे आपको यहां आने में हो रही असुविधा खत्म हो। बहरहाल, मैं उन तमाम मित्रों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे इसके लिए ईमेल किए और रजिया राज़ ने तो असुविधा के बाद भी टिप्पणी लिखी। कृपया सहयोग बनाए रखें।
एक और बात – इस ब्लॉग पर अगर कोई कुछ लिखना चाहता है तो उसका स्वागत है। आप मुझे अपना लेख ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। लेख के लिए कोई नीति तय नहीं की गई है लेकिन एक बात जो मैं साफ करना चाहूंगा कि कृपया सामाजिक सरोकार (social concerns)को अगर अपने लेख में जगह देंगे तो मैं आपका एहसानमंद रहूंगा। मैं चाहता हूं कि हम सब लोग मिलकर एक-दूसरे के ब्लॉग पर कुछ न कुछ लिखें, यकीन मानिए इससे आपके क्षितिज का विस्तार होगा। मसलन, डॉ. अनुराग, प्रदीप मानोरिया, शहरोज और फिरदौस के ब्लॉग पर आने वाले विजिटर अलग-अलग हैं, आपकी बात उनके विजिटर तक पहुंचेगी और आपकी बात उनके विजिटर तक। मेरे इस ब्लॉग के लेखों को लेने का सिलसिला एक वेबसाइट http://medianowonline.com ने शुरू किया है। अभी उन्होंने कंझावला के किसान वाला लेख लिया गया है। वहां से भी लोग बाकी लेख पढ़ने के लिए मेरे इस ब्लॉग पर आ रहे हैं। इसलिए मैं चाहता हूं कि हम सभी Hindi Bloggers के क्षितिज का विस्तार हो। तय आपको करना है।

1 comment:

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

तीर स्नेह-विश्वास का चलायें,
नफरत-हिंसा को मार गिराएँ।
हर्ष-उमंग के फूटें पटाखे,
विजयादशमी कुछ इस तरह मनाएँ।

बुराई पर अच्छाई की विजय के पावन-पर्व पर हम सब मिल कर अपने भीतर के रावण को मार गिरायें और विजयादशमी को सार्थक बनाएं।