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Wednesday, December 17, 2008

मेरा जूता है जापानी


यह सच है कि मुझे कविता या गजल लिखनी नहीं आती। हालांकि कॉलेज के दिनों में तथाकथित रूप से इस तरह का कुछ न कुछ लिखता रहा हूं। अभी जब एक इराकी पत्रकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर जूता फेंका तो बरबस ही यह तथाकथित कविता लिख मारी। इस कविता की पहली लाइन स्व. दुष्यंत कुमार की एक सुप्रसिद्ध गजल की एक लाइन – एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो – की नकल है। क्योंकि मेरा मानना है कि बुश जैसा इंसान (?) जिस तरह के सुरक्षा कवच में रहता है वहां तो कोई भी किसी तरह की तबियत लेकर पत्थर नहीं उछाल सकता। पत्थर समेत पकड़ा जाएगा। ऐसी जगहों पर तो बस जूते ही उछाले जा सकते हैं, क्योंकि उन्हें पैरों से निकालने में जरा भी देर नहीं लगती।
मुझे पता नहीं कि वह किसी अमेरिकी कंपनी का जूता था या फिर बगदाद के किसी मोची ने उसका निर्माण किया था लेकिन आज की तारीख में वह जूता इराकी लोगों के संघर्ष और स्वाभिमान को बताने के लिए काफी है। इतिहास में पत्रकार मुंतजर जैदी के जूते की कहानी दर्ज हो चुकी है। अब जरा कुछ क्षण मेरी कविता को भी झेल लें – (शायर लोग रहम करें, कृपया इसमें रदीफ काफिया न तलाशें) -

कब तक चलेगी झूठ की दुकान

-यूसुफ किरमानी


एक जूता तो तबियत से उछालो यारो
ताकतें कोई भी हों उनको तो बस मारो-मारो
बात पहुंचे वहां तक जहां पहुंचनी चाहिए
सच्चाई हर सूरत में सामने आनी चाहिए

तुम चलाओ तोप या बरसाओ गोलियां
हम बे-जबान जरूर बोलेंगे अपनी बोलियां
सब जानते हैं तुम्हारी चालाकी और मक्कारी
जनता जब तुमसे कहेगी बंद करो ये ऐय्यारी

हुक्मरां अंधे हों या फिर बहरे
कहां-किस-किस पर लगाएंगे पहरे
हौसला न तोड़ पाएंगे तुम्हारे पैरोकार
वक्त है, अब बाज भी आओ सरकार

कब तलक चलेगी तुम्हारे झूठ की दुकान
देखना खंडहर बन जाएंगे तुम्हारे ये मकान
उसने तो सिर्फ फेंका है आप पर जूता
क्या होता, गर वह उखाड़ फेंकता आपका खूंटा


नीचे लिखी पोस्ट और बुश पर इराकी पत्रकार द्वारा फेंके गए जूते का विडियो जरूर देखें। उससे मेरी इस कविता का संदर्भ समझने में आसानी रहेगी। धन्यवाद।

9 comments:

Dr. Amar Jyoti said...

इब्तिदा-ए-इश्क़ है, रोता है क्या,
आगे-आगे देखिये होता है क्या।
:)

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब भाई अब कुछ सालो बाद इन जुते की नीलाम भी होगी... लाखो मे बिकेगा यह जुता, अगर लग जाता तो करोडो ओर अरबॊ मे बिकता....
कविता सुंदर लिखी है.
धन्यवाद

Anurag TIwari said...

Kash!!! Kuch Joote Hamaare Desh me bhi chal jaate Kisi press confrence me ;)

Dimps said...

Kamaal kar diya :) Very nice n decent blog... Great work done!!

Jyotsna Pandey said...

joota japani na hokar agar hindustani hota .........
to maza doguna ho jata ,
shukriya,

chandan said...

Jaidi to history main amar ho gaya aur saath main uska joota bhi. Par Joota banane wale mochi ko bhi dhondhiye. Usko bhi credit deejiye.

Hum to bas yehi kahenge:
Joote ko rahne do Joota na uthao
Joota jo uth gaya to bhed khul jayega... theek Bush jaisa

Ek ziddi dhun said...

ऐसे मौकों पर काले कपड़े वालों को नहीं घुसने दिया जाता। अब शायद पत्रकारों के जूते भी उतरवाए जाने लगें। अपने पत्रकार तो बुश के लिए सब कुछ उतारने तक को तैयार रहते हैं।

Vineeta Yashswi said...

Bahut Achha....lekhe bhi aur kavita bhi

Sheena said...

Kisne kaha aapko likhna nahi aata. Aap bahut badiya likhte hai.
Aise hi current topics par likhte rahiye.