मोदी जी खिलाएं गाय को चारा, कहां गया वो माखन चोर प्यारा

 - यूसुफ किरमानी


कितनी खूबसूरत तस्वीर है...गौर से देखिए...



लेकिन ये फोटो कुछ लोगों को हज़म नहीं हो रही है।



क्या देश का प्रधानमंत्री गाय को चारा नहीं खिला सकता।






हम लोग जब कोई फोटो कहीं लगाने के लिए सेव करते हैं तो उसे एक नाम देते हैं। लेकिन जब मैंने इसे सेव करते हुए नाम दिया तो खुशी से उछल पड़ा।



मैंने इसका नाम दिया था- मोदी काऊ यानी मोदी गाय।



है न शानदार नाम।


कोई ताज्जुब नहीं कि राज्यों में पशुपालन विभाग अब मोदी गाय को हाइब्रिड बनाकर इसका उत्पादन शुरू न कर दे। अभी मैंने मोदी काऊ का पेटेंट नहीं कराया है। अगर कोई इस नाम यानी मोदी काऊ या मोदी गाय का इस्तेमाल करे तो कृपया इस खाकसार को श्रेय देना न भूलें।



श्रेय देने से प्यार बढ़ता है।



थोड़ा विषयांतर करते हैं।




देश में एक बीमारी चल रही है मोदी जी को बुरा बोलते रहो। लेकिन ये सब गलत है। कोई मोदी जी का कुछ उखाड़ नहीं पाएगा। 2024 का चुनाव होने दीजिए और मोदी जी को आने दीजिए। ये सारे के सारे बिलों में छिप जाएंगे। क्योंकि देश 2024 के बाद बदल जाएगा।



अभी जो मेरी चिन्ता का विषय है वो है अयोध्या में राम मंदिर का मूल जगह पर नहीं बनना। ये बात भाजपा के ही सुब्रह्मण्यम स्वामी बता रहे हैं।



बाबरी मसजिद को जहां शहीद किया गया, भाजपा, आरएसएस, विहिप, बजरंग दल ने मंदिर वहीं बनाने की बात कही थी। उनका नारा ही था- राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। स्वामी का कहना है कि उस मूल जगह से राम मंदिर तीन किलोमीटर दूर बन रहा है।



अगर ये सच है तो 80 फीसदी लोगों से किया गया धोखा होगा। यह हमारे माननीय प्रधानमंत्री के साथ किया गया धोखा होगा। क्योंकि वो बेचारे तो 22 जनवरी को पत्थर की मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा कर आएंगे लेकिन मूल जगह पर नहीं बल्कि नई जगह पर। इस स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है, कम से कम मोदी जी और श्री अमित शाह जी तो कतई जिम्मेदार नहीं हैं।



तो फिर जिम्मेदार कौन है।


मुझे तो लगता है कि इसका जिम्मेदार वो वयोवृद्ध आडवाणी है। क्यों नहीं उन्होंने मंदिर की नींव खोदे जाने के समय बताया कि मंदिर दरअसल कहां बनना है। यह बुजुर्ग मोदी जी से जरूर कुछ हिसाब किताब रखता है। वरना अगर सही गाइड कर देता तो मंदिर सही जगह बन जाता। हालांकि मुझे सुब्रह्मण्यम स्वामी पर पूरा विश्वास नहीं है। ये शख्स झूठ बहुत बोलता है। क्या पता मंदिर 3 किलोमीटर दूर बनने की बात कह कर मोदी जी को .........वही दिखाना चाहता हो। इस स्वामी का कोई भरोसा नहीं।




खैर, ये मेरी चिन्ता थी। जो मैंने बताई। लेकिन मेरे अधिकांश हिन्दू भाई सहिष्णु हैं, भोले-भाले हैं, बहुसंख्यकवाद के आतंक से दूर हैं, मानवता के पुजारी हैं। उनके मन में स्वामी की बात से जरा भी शक नहीं आएगा। क्योंकि सरकार जब मंदिर बनवा रही है तो सब सही होगा। मुख्य पुजारी तक गवाही दे रहे हैं कि सब कुछ ठीकठाक है। चंपत राय जो आरोपों से डरकर अभी चंपत नहीं हुए, बने हुए हैं, वे भी कह रहे हैं कि मंदिर तो अपनी असली जगह पर बन रहा है।




ऐसे में जो दलित चिन्तक बाबा साहब के संविधान की दुहाई देकर अयोध्या में 22 जनवरी के अनुष्ठान के लिए इधर-उधर की बातें लिख रहे हैं, उन्हें विचार करना चाहिए कि अब बाबा के संविधान के दिन लद गए। दलित चिन्तकों को भी इसी हिन्दू राष्ट्र में रहना होगा। उनके लिए अब अलग द्रविड़ राज्य तो बनने से रहा।




2024 के चुनाव के बाद संविधान लाइब्रेरी में रखा जाएगा और देश नए नियम कानून से चलेगा। धर्म और राजनीति एक दूसरे के पर्याय बन जाएंगे।



जो राजनीति होगी, वही राष्ट्र धर्म होगा। जो राष्ट्र धर्म होगा, वही राजनीति होगी।



जिन्हें मनु स्मृति से चलने का डर है, वे बेशक डरकर रहें। राष्ट्र धर्म में मनु स्मृति से बड़ा कोई ग्रंथ नहीं होता। आदत डाल लें। कोट-टाई पहनकर या एवाकार्डो किवी वगैरह खाकर बाबा साहब की पोथी पढ़ना छोड़ दें, चटाई बिछाकर धोती बांधकर मनु स्मृति पढ़ने की आदत डाल लें। ब्राह्मणों का सम्मान करना सीख लें।



गाय का सम्मान करें। गाय पालें, उसे खूब दुलार करें। ड्यूटी जाने या अपने कारोबार पर जाने से पहले माता-पिता के पास जाने की बजाय गाय के पास जाएं। उसे प्रणाम करें। सारे दुख, बीमारी आप से दूर भाग जाएंगे।


बूढ़े माता-पिता आप को उम्र के अंतिम पड़ाव पर पैसे नहीं दे सकते, कैंसर जैसी बीमारी ठीक नहीं कर सकते, लेकिन गाय माता के स्पर्श मात्र से कैंसर ठीक होने के उदाहरण हमने देश की संसद में 2014 के बाद सुने हैं। अगर आप
ऐसी बातें नहीं मानते तो आप मूर्ख हैं। साध्वी प्रज्ञा से पूछिए जो गाय माता के कारण संसद में पहुंच गईं। उनके मतदाताओं ने उन्हें वोट ही इसलिए दिया कि साध्वी प्रज्ञा गाय माता की बहुत सेवा करती थीं और अपनी तमाम बीमारियां गाय के दूध, गोबर और गोमूत्र से ठीक कर लीं।




वेद और शास्त्रों को डाइनिंग टेबल पर रखें और संस्कृत सीखना शुरू कर दें। इस अंग्रेजी और उर्दू ने हमे बर्बाद कर दिया। हिन्दी पढ़ने से रोजगार नहीं मिल रहा। इसलिए 2024 के चुनाव के बाद संस्कृत भाषा को मुख्य भाषा बनाने पर विचार हो सकता है। जो संस्कृत सीखे रहेगा, वो आगे निकल जाएगा। संस्कृत वैसे भी देवताओं की भाषा रही है। मोदी जी आपको देव तुल्य बनाना चाहते हैं। संस्कृत सीखने में क्या हर्ज है। हमारे जानने वाले शास्त्री जी लंबे समय से बेरोजगार थे। संस्कृत अच्छी आती थी। अभी उन्हें आकाशवाणी पर 15000 रुपये की नौकरी संस्कृत के कारण मिल गई।




तो, संस्कृत सीख कर वेद, पुराण, रामायण रोजाना पढ़ने की आदत डालें। मन मलिन हो जाए तो अनूप जलोटा के भजन लगा लें या प्रधान सेवक के भाषणों की सीरीज सुनें। जीवन शैली में बदलाव लाएं।



कुछ लोगों को चुल लगी होती है, वो ईमेल भेजकर या फोन करके जरूप पूछेंगे कि चारा को माखन चोर प्यारा से जोड़ने की क्या जरूरत थी। यह सवाल सवर्था उचित है सुधिजनों।



वो क्या है कि अयोध्या अनुष्ठान के चक्कर में माखन चोर की चर्चा ही बंद हो गई है। इसलिए मैंने कोशिश की है कि माखन चोर कृष्ण कन्हैया की चर्चा रुकने न पाए। ....अयोध्या तो झांकी है, मथुरा-काशी बाकी है। मेरे प्यारे बंधुओं, शाखा नंदनों चर्चा बंद मत करना। हमें पूरे भारत को पूरी दुनिया के सामने गौरवशाली हिन्दू राष्ट्र बनाना है।


- यूसुफ किरमानी copyrights2024@YusufKirmani



(डिस्क्लेमरः आप इसका इस्तेमाल लेखक को क्रेडिट देते हुए राष्ट्रहित में कर सकते हैं। लेकिन जो लिखा गया है, उतना ही पढ़ें। इस व्यंग्य में अपना दिमाग लगाने की कोशिश न करेंः लेखक।)









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