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इस्लामाबाद में निर्णायक घड़ी: ईरान-अमेरिका बातचीत के बीच बदलता दुनिया का समीकरण

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यह लेख इस्लामाबाद में हो रही ईरान-अमेरिका वार्ता के बहाने बदलते वैश्विक और मध्य-पूर्वी समीकरणों की गहराई को समझने की कोशिश है। इसमें कूटनीति, युद्ध, सत्ता, और विचारधाराओं के टकराव को विश्लेषित किया गया है। साथ ही यह सवाल उठाता है कि क्या दुनिया एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां बातचीत युद्ध पर भारी पड़ सकती है- या फिर इतिहास खुद को दोहराने वाला है।  Islamabad at a Turning Point: Iran–US Talks Reshape the Power Balance इस्लामाबाद में मंच सज चुका है। ईरानी और अमेरिका के डेलीगेशन अपने-अपने देशों से रवाना हो चुके हैं।  ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद में पहुंच जाएगा। इस्लामाबाद वीरान है। दो दिन की छुट्टी घोषित की गई है। ईरानी डेलीगेशन को सात स्तरीय सुरक्षा दी गई है। अमेरिकी डेलीगेशन अलग कमरे में एडवांस कैमरों के ज़रिए ईरानी डेलीगेशन को सुनेगी। अपनी बात कहेगी। दोनों तरफ से ढेरों अनुवादक साथ हैं, ताकि बातचीत की कोई लाइन बिना समझे न रह जाए। इसी बीच यह घटनाक्रम भी हुआ है कि लेबनान और इज़राइल अब सीधे बात कर रहे हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने नेतन्याहू से फोन पर बात की। उसके बाद ने...

क्या अब खत्म हो जाएगी अमेरिकी दादागीरी?

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बराक ओबामा ने जब डेमोक्रेट उम्मीदवारी की रेस में हिलेरी क्लिंटन को पछाड़ा था, तभी इस बात की भविष्यवाणी की गई थी कि यह चुनाव विश्व इतिहास का टर्निंग पॉइंट साबित होने जा रहा है। ओबामा ने अमेरिकी मानस को समझा और बदलाव का नारा देकर अमेरिकी लोगों का दिल जीत लिया। हम भारतीय या यह कह लें कि एशियाई लोगों के लिए इस जीत का मतलब क्या है और क्या हमें वाकई ओबामा की जीत से खुश होना चाहिए। मैं यह नहीं कहता कि सारे गोरे (यहां अंग्रेजों के संदर्भ में लें) काले लोगों से चिढ़ते हैं लेकिन गोरों की एक बहुत बड़ी आबादी कालों से वाकई चिढ़ती है। यही वजह रही कि अमेरिका में तमाम काले लोग गोरों की घृणा का शिकार हुए। इसलिए हम भारतीयों को इस जीत पर इसलिए जरूर खुश होना चाहिए कि व्हाइट हाउस में पहली बार एक काला व्यक्ति कुर्सी संभालने जा रहा है। अब गोरे कम से कम खास जगहों पर यह तो नहीं लिख सकेंगे कि इंडियन एंड डॉग्स आर नॉट एलाउड हियर (यहां कुत्तों और भारतीयों का प्रवेश वर्जित है)। ओबामा की जीत पर काले लोगों की विजय के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती ओबामा के सामने है कि क्या वह दुनिया को इस्राइल के आतंकवाद से मुक्ति दिला पाए...