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सोनम वांगचुक के आंदोलन में नया मोड़: बदल रही है राजनीतिक रणनीति?

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लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का आंदोलन अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां राजनीतिक संकेत पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। लंबे समय से जारी उनके अनशन और दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो का 19 जुलाई को दिया गया बयान इस पूरे आंदोलन की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है। गीतांजलि आंगमो ने संकेत दिया कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता सोनम वांगचुक से मिलकर यह भरोसा दिलाएं कि संसद के मानसून सत्र में लद्दाख, जवाबदेही और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा, तो सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। यह बयान कई सवाल खड़े करता है। क्या आंदोलन अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुका है? क्या यह सरकार पर नैतिक दबाव बनाने की रणनीति है या फिर आंदोलन को सम्मानजनक तरीके से समाप्त करने का रास्ता खोजा जा रहा है? एक दिन में बदला संदेश दिलचस्प बात यह है कि इससे ठीक एक दिन पहले गीतांजलि आंगमो का रुख अलग दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा था कि यदि सोनम वांगचुक संसद मार्च में शामिल नहीं हो सके तो वह स्वयं मार्च का नेतृ...

होर्मुज पर अटका सौदा: इस्लामाबाद वार्ता के बीच धमकियों, चेतावनियों और कूटनीतिक खेल का बड़ा खुलासा

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  इस्लामाबाद से कोई नई खबर नहीं है। बस, यही की ईरान और अमेरिका ने दो दौर की बातचीत पूरी कर ली है। पाकिस्तान चाहता है कि कम से कम एक दौर की बातचीत और हो। यह आज राज या कल संडे को मुमकिन है। लेकिन एक चौंकाने वाली चीज़ सामने आई है। उसे सबसे अंत में बताऊंगा।  अगर पूछें कि आज की बातचीत का लब्बोलुआब क्या है। आज की बातचीत में होर्मुज मुख्य मुद्दा रहा। होर्मुज दरअसल ईरान और ओमान की साझा मालिकाना हक है। अमेरिका जबरन इसमें अपनी हिस्सेदारी चाहता है। यह ट्रंप और उसके गैंग का लालच है। ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर कहा भी था कि हम तो पैसा कमाने आए हैं। ईरान के साथ या तो पार्टनरशिप होगी या पूरा होर्मुज हमारा होगा। इस पर आज की बातचीत में कोई फैसला नहीं हो पाया। अगर बातचीत टूटी तो होर्मुज पर ही टूटेगी।  जब बातचीत जारी थी तो ट्रंप ने हरकत की। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज खाली कराया जा रहा है। ईरान ने होर्मुज की तरफ जा रहे युद्धपोत को फुजैराह बंदरगाह से आगे बढ़ते ही चेतावनी दी। कहा कि अगर 30 मिनट में वापस नहीं हुए तो हमला किया जाएगा। इसकी सूचना इस्लामाबाद भी पहुंची। वहां भी अफरातफरी का मा...

इस्लामाबाद की दहलीज़ पर टकराव: संकेत, सियासत और साया-ए-जंग

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Iran US Islamabad Talks: what's going on and developments ईरान-अमेरिका वार्ता से पहले बढ़ता तनाव, कूटनीतिक संकेतों की जंग और वैश्विक राजनीति की उलझनें इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि इस्लामाबाद की बातचीत सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक मोड़ का संकेत हो सकती है। मुझे नहीं मालूम कि कल 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में क्या होने वाला है। मैं नई दिल्ली में बैठकर कोई अटकल नहीं लगाना चाहता। लेकिन हम कुछ तथ्य सामने रखकर संकेत समझ सकते हैं। हाई क्लास कूटनीति में इशारे ही काफी होते हैं। आइए, इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होने से पहले इन संकेतों को समझते हैं। पहली बात तो साफ है कि ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित वार्ता से पहले कूटनीतिक और सैन्य तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf (एम.बी. ग़ालिबाफ़ ) ने साफ संकेत दिया है कि बातचीत शुरू होने से पहले दो अहम शर्तों को पूरा किया जाना जरूरी है। ग़ालिबाफ़ के मुताबिक, लेबनान में तत्काल युद्धविराम और ईरान की ब्लॉक की गई संपत्तियों की रिहाई, ये दोनों कदम बातचीत से पहले लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि ...