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बात नफरत की दूर देश तक जा पहुंची है

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India's hate environment is being discussed abroad भारत में बने नफ़रत (hate) के माहौल को लेकर भले ही कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी को चिन्ता हो, लेकिन दुनिया में कई और जगहों पर भी इस पर चिन्ता जताई जा रही है। अगर कोई नहीं समझने को तैयार है, तो वो हैं - भाजपा और आरएसएस (BJP, RSS)। जिस देश में महंगाई, बेरोज़गारी, भुखमरी, अशिक्षा, दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था मुद्दा ही नहीं हैं। राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर बहस अफ़्रीका से चीता लाए जाने और उन्हें छोड़ने पर हो रही हो।   दो दिन पहले जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के बर्कले सेंटर फॉर रिलिजन, पीस एंड वर्ल्ड अफेयर्स के एक वरिष्ठ फेलो जॉक्लीने केसरी ने द कन्वर्सेशन यूएस की एक पत्रकार और संपादक कल्पना जैन के साथ भारत में मुस्लिम विरोधी अभद्र भाषा और हिंसा (hate violence) के उदय पर चर्चा की। विद्वानों और पत्रकारिता के दृष्टिकोण को मिलाकर, दोनों ने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने देश के हिंदू बहुसंख्यकों के बीच मुसलमानों के प्रति साम्प्रदायिक नज़रिया और माहौल का निर्माण किया है।       2014 में मोदी के सत्ता मे