बेरोज़गार युवक 22 जनवरी को फ़ैज़ाबाद क्यों जा रहे हैं



पेटीएम (Paytm)  ने 1,000 कर्मचारी निकाले...



निकाले गए बेरोज़गार कर्मचारियों ने कहा- हम 22 जनवरी 2024 को फ़ैज़ाबाद (#Faizabad) प्रधानसेवक जी से मिलने जा रहे हैं। नौकरी मिलेगी कैसे नहीं?




गूगल, फ़ेसबुक (मेटा), ऐप्पल, ऐमजॉन, नेटफिलिक्स ने भारत में भर्ती पर रोक लगाई। #Google, #Meta, #Apple, #Netflix pause hiring in India.



कर्मचारियों ने कहा- हम 18 घंटे अपने प्रधान सेवक की तरह काम करने को तैयार। कंपनियों ने कहा- प्रधान सेवक के कहने पर ही अब नौकरियाँ (#Jobs) मिलेंगी। 



इसी विवाद के बीच इस बात की जाँच हो रही है कि आख़िर बेरोज़गारी (#Unemployment) के ख़िलाफ़ माननीयों के दफ्तर में  प्रदर्शन करने वाले सागर शर्मा, ललित झा, अमोल शिंदे, नीलम आज़ाद, मनोरंजन आदि आरोपियों के दिमाग़ में  यह आइडिया कैसे आया? हालाँकि इन बेरोज़गार युवकों के घर से शहीद भगत सिंह की किताबें मिली थीं। लेकिन प्रधानसेवक के भाषण का संबंध भगत सिंह की किताबों से जोड़कर देखने की ज़रूरत महसूस हो रही है।





यह ज्ञात नहीं हो सका है कि आरोपी प्रधानसेवक के 15 लाख वाले जुमले से मोहभंग होने के बाद आरोपी क्या बेरोज़गारी से तंग थे या विश्व बैंक (#worldBankके बढ़ते क़र्ज़ से परेशान थे?



बहरहाल, ख़ुशी की बात यह है कि 22 जनवरी से पहले फ़ैज़ाबाद का एयरपोर्ट #FaizabadAirport) काम करने लगेगा। लेकिन यह बात साफ़ रहे कि बेरोज़गारों और अ.  भ ग तों को टिकट ख़रीदना पड़ेगा। 


एयरलाइंस ने कहा है कि हम बेरोज़गारों को कोई छूट नहीं दे सकते। बेरोजगार चाहें तो पकौड़ा तल कर पैसे जमा करें, फिर फ़ैज़ाबाद की गुलाबबाड़ी देखने आएँ। 





प्रधानसेवक ने पकौड़ा तल कर पैसा जोड़ने वाले बेरोज़गार युवकों के बारे में एयरलाइन्स को सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा है। प्रधानसेवक ने कहा कि गुलाबबाड़ी में फूल तोड़ने की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि ने ह रू वहाँ के फूल अपनी शेरवानी में लगाते थे। इसलिए गुलाब तोड़ने पर रोक है।



22 जनवरी को फ़ैज़ाबाद आने वाले जाट समुदाय (#JatCommunity) के युवकों से कहा गया है कि वे खाट लेकर आएँ या वहाँ इंतज़ाम करें क्योंकि फ़ैज़ाबाद की जाट महासभा खाट का इंतज़ाम नहीं कर सकी है। कुछ खाट पकौड़े तलने वाले जाट युवकों को उपलब्ध कराई जा सकती है।





विश्व स्तर पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के युवक बेरोजगार होने के कारण अब धार्मिक होते जा रहे है। वो अब मोह माया से मुक्त हो चुके हैं। उनका कहना है कि पेट को रोटी मिले न मिले, वो फ़ैज़ाबाद में भव्य भवन ज़रूर देखना चाहते हैं। इन युवकों का कहना है कि धर्म बचा रहना चाहिए। धर्म बचेगा तो देश बचेगा, प्रधानसेवक और उसकी नारंगी पार्टी भी बची रहेगी। मोह माया से दूर इन युवकों का कहना है कि हमें तो न माया मिली, न ...फलाने। लेकिन देश हमारे लिए प्रथम है।


(श्री यूसुफ किरमानी के  फ़ेसबुक पेज से साभार)



वैधानिक चेतावनी : व्यंग्य को व्यंग्य की तरह लें। प्रधानसेवक के अंड भक्त इस पोस्ट से दूर रहें क्योंकि उन्हें इसे पढ़ने के बाद बीपी वग़ैरह बढ़ने की शिकायत हो सकती है। भावनाएँ आहत होने का ज़िम्मेदार लेखक नहीं है। इस लेख के लिए किसी संगठन द्वारा पुरस्कार आदि पर विचार करना मना है। लेखक साहित्य अकादमी का पुरस्कार पहले ही ठुकरा चुका है।




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