तैना शाह आ रहा है...

 तैना शाह आ रहा है

..............................


जनता, बजाओ ताली की तैना शाह आ रहा है
हाँ, ख़ाली है थाली, पर धर्म तो जगमगा रहा है



बिछाओ मसनद, सजाओ राजमुकुट उसका
धर्म की आग में झुलसेगा अब हर तिनका



तुम्हें समन्दर क्यों चाहिए, जब दरिया छोड़ दिया है
प्यासे न मरोगे, उसने चुल्लू भर पानी छोड़ा दिया है



ख़ूब चाटो बाबा की किताब, जनतंत्र मर चुका
जब हिटलर ही धर्मतंत्र का ऐलान कर चुका



हमने दरिया में लाशें देखीं और तैना शाह के तराने देखे
खबरें बनाती रहीं तमाशा हमारा, एंकर ऐसे सयाने देखे



कहीं से अब कोई सदा नहीं आती यूसुफ ए किरमानी
ज़रा ज़ोर से बजाओ बिगुल, सुनाओ कोई नई कहानी

@YusufKirmani January 22, 2024





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अली खान महमूदाबाद: संवैधानिक मूल्यों पर खतरा

ग़ज़लः हर मसजिद के नीचे तहख़ाना...

ग़ाज़ा से एक नाज़ुक लव स्टोरी