लघु कथा: क्वारंटाइन

मोबाइल लॉक करते ही स्क्रीन पर अंधेरा छा गया। डिजिटल दुनिया क़ैद हो चुकी थी। उसकी आँखों के सामने स्क्रीन पर बाहर दुनिया की परछाईं किसी फ़िल्म सीन जैसी लगी। वह लेटी लेटी अपने बिस्तर से उठी, विंडो से बाहर देखा। बाहर के आज़ाद नज़ारों को देखकर उसकी नज़रें ललचा रही थीं। फिर यूँ ही उसके मन में ख़्याल आया कि चीज़ों की कीमत उनके खो जाने के बाद क्यों पता चलती है? 
-मुस्तजाब किरमानी 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अदालतें भी तो अपने गिरेबान में झांकें

पहले फतवा...बाकी बातें बाद में

आइए, एक जेहाद जेहादियों के खिलाफ भी करें